पेट्रोल और डीजल की कीमत में कुछ दिनों की नरमी के बाद एक बार फिर तेजी आने लगी है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछाल भारत के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इसका असर देश की विकास दर पर भी नकारात्मक रूप से पड़ सकता है।

कु छ दिन की राहत के बाद एक बार फिर कच्चे तेल की कीमत सिर उठाने लगी है। इसके साथ ही आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती का पुन: अहसास होने लगा है। नया साल शुरू होते ही कच्चे तेल की कीमतों उछाल भरती नजर आ रही है। अभी तक इसकी कीमत में लगभग 16 फीसदी की तेजी आ चुकी है। इसका असर भारतीय बाजार में भी नजर आने लगा है। देश की तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती करने का रुख छोड़कर एक बार फिर बढ़ोतरी करना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूस तथा आॅर्गेनाईजेशन आॅफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) ने कच्चे तेल के दाम में गिरावट को थामने के लिए एक जनवरी से ही उत्पादन में रोजाना 12 लाख बैरल की कटौती करनी शुरू कर दी है। इसके साथ ही अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक मुद्दों को लेकर चल रहे ट्रेड वॉर की स्थिति में सुधार होने की वजह से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की खपत बढ़ने की उम्मीद बन गई है। आलम यह है मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कच्चे तेल का वायदा अनुबंध 2.25 फीसदी की बढ़त हासिल कर चुका है, जबकि विदेशी वायदा बाजार इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज में ब्रेंट क्रूड की मार्च डिलीवरी में भी 2.1 फीसदी की तेजी देखी गई है। हाल के सालों में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अमेरिका ने खुद को विश्व के प्रमुख तेल उत्पादक देश के रूप में स्थापित किया है। जनवरी के पहले सप्ताह में अमेरिकी एजेंसी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी तेल भंडार में 69 लाख बैरल की बढ़ोतरी हुई है। स्पष्ट है कि अमेरिका अब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी अपना दबदबा बनाने की तैयारी में जुट गया है। अमेरिका द्वारा अपने तेल उत्पादन में अनुमान के विपरीत काफी बढ़ोतरी किए जाने की वजह से ही अक्टूबर 2018 के बाद से ही तेल की कीमत में गिरावट का रुख बना था। अमेरिकी दबाव में सऊदी अरब ने भी कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा दिया था, जबकि रूस भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा की अपनी जरूरतों को देखते हुए तुलनात्मक तौर पर अधिक मात्रा में कच्चे तेल का उत्पादन कर रहा था। इन तीनों देशों द्वारा मिलकर ओपेक देशों के कुल उत्पादन से अधिक कच्चे तेल का देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन में की गई कटौती को जल्द वापस नहीं लिया, तो इससे भारत जैसे विकासशील देशों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। भारत फिलहाल दुनिया में सबसे तेज गति से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर चुका है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में होने वाली उथलपुथल अकेले ही भारतीय अर्थव्यवस्था की छलांग को आसानी से बाधित कर सकती है। सबसे अहम बात तो यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर भारतीय बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की कीमत में बढ़ोतरी के रूप में नजर आएगा। भारत में चुनावी वर्ष में तेल की कीमतों में होने वाली मामूली बढ़ोतरी भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। तेल की कीमत में होने वाली बढ़ोतरी से राजनीतिक मोर्चे पर भी गर्मी बढ़ेगी और यह बात केंद्र सरकार को परेशान करने वाली साबित हो सकती है।  उत्पादन किया जा रहा था। ऐसे में स्वाभाविक रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में नरमी आई थी, लेकिन अब ओपेक तथा गैर ओपेक देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती की बात पर सहमति जता कर एक बार फिर कच्चे तेल की कीमत को चिंगारी दिखा दी है। ये बात भारत जैसे देश के लिए काफी भारी साबित हो सकती है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से ही खरीदता है। भारत के आयात बिल में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भी कच्चे तेल के आयात की ही है। इसलिए यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में और तेजी आती है, तो भारत का आयात बिल तो बढ़ेगा ही, व्यापार घाटा भी बढ़ेगा, जो आगे चलकर देश की विकास दर को भी प्रभावित करेगा। आयात बिल बढ़ने से डॉलर की मांग भी एक बार फिर तेज होगी, जिसका परिणाम रुपये की कीमत घटने के रूप में नजर आयेगा। माना जा रहा है कि पेट्रोलियम उत्पादक

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रांची विश्वविद्यालय से स्नातक। वर्ष 1988 में रांची में ही फील्ड रिपोर्टर के रूप में रांची एक्सप्रेस से जुड़े। उसके बाद साप्ताहिक रविवार, प्रभात खबर, सेंटिनल, पांचजन्य, राजस्थान पत्रिका, टेलीग्राफ, इकोनॉमिक्स टाइम्स, अमर उजाला, बीएजी फिल्म्स, न्यूज 24, इंडिया टीवी, जी न्यूज जैसी संस्थाओं के लिए उप संपादक से लेकर विशेष संवाददाता, सहायक फीचर एडिटर, समन्वय संपादक, एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। टीवी की दुनिया में ‘पोलखोल’ और ‘सनसनी’ जैसे कार्यक्रमों का भी प्रोडक्शन किया है।

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