गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिए भारत के साथ युद्ध का सामना करना आसान नहीं होगा। भुगतान संकट की स्थिति का सामना कर रहा पाकिस्तान यदि भारत के साथ घोषित युद्ध करता है, तो उसे खुद को दिवालिया होने से बचा पाना मुश्किल हो जायेगा।

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ चुका है। बार-बार उकसावे की कार्रवाई करने वाला पाकिस्तान पहली बार युद्ध के हालात से पीछे हटने की कोशिश कर रहा है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि घोषित युद्ध होने की स्थिति में उसके लिए एक सप्ताह का खर्च भी संभाल पाना कठिन हो जाएगा। दिवालियेपन के कगार पर खड़े पाकिस्तान के पास इतना पैसा भी नहीं बचा है कि वो युद्ध संचालन के लिए अपने खजाने को टटोल भी सके। 25 फरवरी को सेंट्रल बैंक आॅफ पाकिस्तान द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल उसके पास 13.75 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है।
इस पैसे का उपयोग अत्यावश्यक आयात के लिए ही हो सकता है। अब अगर पाकिस्तान पर लदे कर्ज की बात की जाये, तो सिर्फ निजी संस्थानों से ही पाकिस्तान ने 36.52 बिलियन डॉलर (लगभग 5101.94 बिलियन पाकिस्तानी रुपये) का कर्ज लिया हुआ है। इसी तरह पाकिस्तान पर 90 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी कर्ज चढ़ा हुआ है। जिसके एवज में उसे प्रतिवर्ष ब्याज और मूलधन का एक छोटा सा हिस्सा चुकाने में 12 बिलियन डॉलर का खर्च करना पड़ता है। पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ जफर आगा के मुताबिक मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार के बल पर पाकिस्तान एक साल का ब्याज और मूलधन का छोटा हिस्सा चुका पाने की स्थिति में नहीं है।
ऐसा कहना इसलिए भी प्रासंगिक हैं क्योंकि सिर्फ पेट्रोलियम के आयात पर ही उसे सालाना 380 मिलियन डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा खाद्यान्न तथा अन्य जरूरी वस्तुओं के आयात पर भी उसे भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी होती है। दोनों देशों के बीच घोषित युद्ध होने की स्थिति में उसे अपनी सामरिक जरूरतें भी पूरी करनी होंगी। अमेरिकी फंडिंग रुकने के कारण 2018 की फरवरी के बाद पाकिस्तान अपने हथियार भंडार के लिए नई खरीद नहीं कर सका है। परेशानी ये है कि पाकिस्तान अपने सारे हथियार अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदता है या कम ब्याज दर पर चीन से उधार के रूप में लेता है। चीन पाकिस्तान को हथियार उपलब्ध कराता है।
पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज में सबसे बड़ी राशि भी चीन की ही है। कुल 90 बिलियन डॉलर के कर्ज में से 19 बिलियन का कर्ज अकेले चीन ने ही पाकिस्तान को दिया है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक अगर युद्ध होने की स्थिति में पाकिस्तान को रोजाना लगभग 5000 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का खर्च उठाना पड़ेगा। पहले से ही जर्जर हालत में पहुंच चुके पाकिस्तान के लिए इस आर्थिक बोझ को संभाल पाना काफी कठिन हो सकता है। बात सिर्फ पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार की ही नहीं है। उसके रुपये की कीमत डॉलर की तुलना में गिर कर 140 के स्तर तक पहुंच चुकी है। सिर्फ जनवरी और फरवरी में ही पाकिस्तानी रुपये की कीमत में 42 फीसदी का अवमूल्यन हुआ है।
जानकारों का मानना है कि यदि भारत के साथ पाकिस्तान को दो सप्ताह तक भी युद्ध करना पड़ा, तो पाकिस्तानी रुपये की कीमत गिरकर 200 रुपये के स्तर से भी नीचे जा सकती है। पाकिस्तान के पास युद्धक विमानों के संचालन के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन भी नहीं है। यही वजह है कि 27 फरवरी को ही पाकिस्तान पेट्रोलियम डिवीजन के सेक्रेटरी की अध्यक्षता में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर विचार किया। बैठक में फैसला लिया गया कि विमानों के ईंधन की जरूरत को पूरा करने के लिए नागरिक उड्डयन सेवा में तत्काल कटौती की जाए। पाकिस्तान सरकार ने 27 फरवरी को ही आॅयल कंपनी एडवाइजरी काउंसिल की मीटिंग के बाद चीन से भी ईंधन के क्षेत्र में सहयोग करने की अपील की है।
ऐसा नहीं है कि युद्ध होने की स्थिति में भारत की अर्थव्यवस्था पर उसका असर नहीं पड़ेगा। युद्ध हुआ तो भारत को भी प्रति सप्ताह लगभग नौ बिलियन डॉलर का खर्च करना पड़ेगा। राहत की बात सिर्फ यही है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 405 बिलियन डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। इसलिए युद्धक सामग्री की व्यवस्था करने में भारत को उतनी परेशानी नहीं होगी।

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रांची विश्वविद्यालय से स्नातक। वर्ष 1988 में रांची में ही फील्ड रिपोर्टर के रूप में रांची एक्सप्रेस से जुड़े। उसके बाद साप्ताहिक रविवार, प्रभात खबर, सेंटिनल, पांचजन्य, राजस्थान पत्रिका, टेलीग्राफ, इकोनॉमिक्स टाइम्स, अमर उजाला, बीएजी फिल्म्स, न्यूज 24, इंडिया टीवी, जी न्यूज जैसी संस्थाओं के लिए उप संपादक से लेकर विशेष संवाददाता, सहायक फीचर एडिटर, समन्वय संपादक, एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। टीवी की दुनिया में ‘पोलखोल’ और ‘सनसनी’ जैसे कार्यक्रमों का भी प्रोडक्शन किया है।

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