नरेश गोयल के इस्तीफे के बाद जेट एयरवेज का संकट कुछ हद तक हल होता नजर आने लगा है। लेकिन बुलंदी की उड़ान भरने वाली इस कंपनी के पतन से साफ हो गया है कि आर्थिक कुप्रबंधन किसी भी कंपनी का सत्यानाश कर सकता है। जेट एयरवेज के मामले में भी यही हुआ है।

जेट एयरवेज के चेयरमैन पद से नरेश गोयल के इस्तीफा देने के बाद कंपनी के हालात में सुधार होने की संभावना बनने लगी है। गोयल के साथ ही उनकी पत्नी अनीता गोयल ने भी कंपनी के निदेशक मंडल से अपना इस्तीफा दे दिया है। एक समय में भारत की तमाम विमानन कंपनियों का सिरमौर बनाने वाले और फिर उसे अर्श से फर्श तक ले आने वाले नरेश गोयल की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 300 रुपये महीने की नौकरी से अपने करियर की शुरुआत करने वाले नरेश गोयल कुछ दिन पहले तक निजी विमानन कंपनियों के बीच अगुआ माने जाते थे, लेकिन आर्थिक प्रबंधन ने जेट एयरवेज को तो धक्का पहुंचाया ही नरेश गोयल की भी लुटिया डुबो दी।
आज स्थिति यह हो गयी है की 1993 में शुरू हुई कंपनी के लिए माना जाने लगा है कि अगर जल्द ही उसमें पुनर्निवेश नहीं हुआ, तो इस कंपनी का भी अंत हो सकता है। नरेश गोयल और अनीता गोयल के पद छोड़ने के बाद बैंकों के समूह ने जेट एयरवेज को डेढ़ हजार करोड़ रुपये की तत्काल सहायता दी है। लेकिन भारी-भरकम कर्ज में फंसी हुई इस कंपनी को देखते हुए इतनी सहायता से जेट एयरवेज पर लदे कर्ज का भुगतान होना तो दूर, μलाइट क्रू के सदस्यों और पायलटों के वेतन तथा कैंसिल किए गए टिकट के पैसे की वापसी कर पाना भी पूरी तरह से संभव नहीं है।
आर्थिक कुप्रबंधन के कारण कर्ज के बोझ के तले दबे जेट एयरवेज की संचालन प्रक्रिया पिछले कुछ समय से बुरी तरह से प्रभावित हो रही थी। नए निवेशक नहीं मिलने पर भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई में कर्जदाताओं ने ऋणशोधन की प्रक्रिया अपनायी और नरेश गोयल से चेयरमैन का पद छोड़ने और कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाने की बात कही। पिछले 25 मार्च को जेट एयरवेज के निदेशक मंडल की बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि नरेश गोयल, उनकी पत्नी अनीता गोयल और जेट एयरवेज के प्रमुख हिस्सेदार एत्तिहाद एयरवेज की ओर से नामित निदेशक केविन नाइट को अपना पद छोड़ना होगा। इस निर्णय के मुताबिक इन तीनों ने अपना पद छोड़ दिया।

कैसे बिगड़े हालात
28 अगस्त, 2018: जेट ने कर्मचारियों से 25 फीसदी कम वेतन लेने को कहा।
सितंबर, 2018: असंतोष को कम करने के लिए कंपनी ने 84 फीसदी कर्मचारियों को वेतन दिया।
अक्तूबर, 2018: जेट को खरीदने को लेकर टाटा समूह और डेल्टा एयरलाइन से बातचीत विफल हो गयी।
नवंबर, 2018: तीसरी तिमाही में कंपनी को काफी नुकसान हुआ।
दिसंबर, 2018: कंपनी ने 19 अप्रैल, 2019 तक कर्मचारियों का बकाया देने की बात कही। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने जेट एयरवेज की रेटिंग बी से घटाकर सी कर दी।
जनवरी, 2019: जेट ने बैंकों के कर्ज के भुगतान में देरी की।
फरवरी, 2019: जेट बोर्ड ने ऋणदाताओं को सबसे बड़ा शेयरधारक बनाकर बचाव के लिए सौदा किया।
मार्च, 2019: जेट एयरवेज के पायलटों ने एयरलाइन को छोड़ अन्य एयरलाइन कंपनियों से जुड़ना शुरू किया। जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल को पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा और कंपनी का प्रबंधन अंतरिम तौर पर कर्जदाता बैंकों के समूह के हवाले करना पड़ा।

अब कर्जदाता बैंकों का समूह कंपनी के निदेशक मंडल में अपने दो नए सदस्य शामिल करेगा और जेट एयरवेज के दैनिक परिचालन तथा कंपनी में नकदी का प्रवाह बनाए रखने के लिए अंतरिम प्रबंधन समिति बनाएगा। माना जा रहा है कि जेट एयरवेज के अंतरिम प्रबंधन का गठन अप्रैल के पहले सप्ताह में ही हो सकता है। इसके साथ ही भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रह चुके एके पुरवार और जानकी वल्लभम में से किसी एक को अंतरिम अध्यक्ष के रूप में जेट एयरवेज की कमान सौंपी जा सकती है। इसके बाद कर्जदाताओं का पैसा निकालने के लिए जेट एयरवेज को बेचने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
जानकारों का कहना है कि सरकार हर हालत में जेट एयरवेज के लिए नए निवेशकों की तलाश और इसे बेचने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कर लेना चाहती है। जहां तक कंपनी की माली हालत की बात है, तो पिछले कुछ समय में जेट एयरवेज के 80 से ज्यादा विमानों के ग्राउंड हो जाने (परिचालन स्थगित हो जाने) के कारण उसकी हालत बहुत खस्ता हो गयी है। वहीं पायलटों ने वेतन का भुगतान नहीं होने पर उड़ान रोकने की भी चेतावनी दी हुई है। हालांकि सरकार जेट एयरवेज को पुनर्जीवित करने की योजना पर तेजी से आगे बढ़ रही है और इस बात का भरोसा दिलाने की कोशिश की गयी है कि अप्रैल के अंत तक जेट एयरवेज के 80 फीसदी हवाई जहाज उड़ान भरना शुरू कर देंगे।
कंपनी की हालत को सुधारने के लिए 26 मार्च को नागरिक उड्डयन मंत्रालय में हुई आपात बैठक में इस बाबत कई अहम फैसले लिये गये। इस बैठक में एसबीआई के चेयरमैन रजनीश सिंह, जेट एयरवेज के सीईओ विनय दुबे, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के प्रमुख बीएस भुल्लर, नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला तथा मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। खरोला ने बैठक के बाद बताया कि फिलहाल जेट एयरवेज के 35 हवाई जहाज उड़ान भर रहे हैं, जबकि अप्रैल के अंत तक 40 और हवाई जहाज उड़ान शुरू हो जाएगी।
इस तरह अप्रैल के अंत तक जेट के 80 फीसदी हवाई जहाज उड़ान भरना शुरू कर देंगे। मई के दूसरे सप्ताह तक इसे बढ़ाकर शत प्रतिशत कर दिया जाएगा। वहीं जेट एयरवेज के चेयरमैन का पद छोड़ने के बाद नरेश गोयल की हिस्सेदारी भी अब घटकर आधी रह गयी है। पहले कंपनी में उनके हिस्सेदारी 51 फीसदी की थी, जो घटकर 25.5 फीसदी रह गयी है। उन्हें जेट एयरवेज के कर्ज का बोझ कम करने के लिए अपने पास के 11.4 करोड़ इक्विटी शेयर कर्जदाताओं के हवाले करना पड़ा है। इन शेयरों के बदले ही बैंकों ने कंपनी को तत्काल प्रभाव से डेढ़ हजार करोड़ रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करायी है। जेट एयरवेज के प्रमुख साझीदार एत्तिहाद एयरवेज के पास अभी भी 24 फीसदी की हिस्सेदारी है। माना जा रहा है नए निवेशकों की तलाश में जेट एयरवेज का अंतरिम प्रबंधन एत्तिहाद एयरवेज को दोहरा सुझाव दे सकता है।
एक सुझाव तो जेट एयरवेज में और पैसा लगाकर उसको अधिगृहित करने का हो सकता है, जबकि दूसरा सुझाव मौजूदा हिस्सेदारी घटाने का हो सकता है, ताकि दूसरा निवेशक स्वतंत्र रूप से कंपनी का प्रबंधन संभाल सके। अपने अभी तक के सफर में जेट एयरवेज ने दुनिया की तमाम विमानन कंपनियों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की है। इसलिए इसको खरीदने के लिए भारतीय के साथ ही कई विदेशी कंपनियां भी कोशिश कर सकती हैं। विदेशी कंपनियों में मुख्य रूप से डेल्टा एयरलाइंस का नाम लिया जा रहा है, जो जेट एयरवेज को खरीद कर दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहे बाजार में अपनी गहरी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है।

नरेश गोयल की डूबी लुटिया
जेट एयरवेज को ऊंचाइयों तक ले जाने वाले नरेश गोयल का जीवन बचपन से लेकर जवानी तक काफी गरीबी में बीता। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने मामा के ट्रैवल एजेंसी से शुरू की थी, जहां खाड़ी देशों के उड़ानों की टिकट बुक की जाती थी। उन्होंने 1974 में जेट एयर के नाम से अपनी ट्रैवल एजेंसी शुरू की। आसमान तक पहुंचने के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने 1993 में अपनी ट्रैवल एजेंसी को बंद कर जेट एयरवेज की नींव रखी। तब उनके पास दो बोइंग विमान हुआ करते थे, जिसका इस्तेमाल चार्टर्ड μलाइट के तौर पर किया जाता था। इसके बाद नरेश गोयल और उनकी कंपनी जेट एयरवेज का सफर तेजी से आगे बढ़ा और 2002 तक जेट एयरवेज ने मार्केट शेयर के मामले में एयर इंडिया को भी पीछे कर दिया। कहा जा सकता है कि 2002 से लेकर 2011 तक का जेट एयरवेज के लिए स्वर्णकाल था। अपने साम्राज्य का विस्तार करते हुए कंपनी ने 2250 करोड़ रुपये में सहारा एयरलाइंस को खरीद लिया। लेकिन 2012 के बाद इंडिगो की आक्रामक विपणन नीति के कारण जेट को नुकसान होने लगा और मार्केट शेयर के साथ ही कमाई के मामले में भी कंपनी को लगातार नुकसान होना शुरू हुआ जो नरेश गोयल के खुद के इस्तीफा पर आकर रुका।

इसके अलावा मध्य पूर्व की कतर एयरवेज भी जेट एयरवेज को खरीदने के लिए बड़ी बोली लगा सकती है। हालांकि कतर एयरवेज ने इसके लिए एत्तिहाद एयरवेज की हिस्सेदारी को शून्य करने की शर्त रखी है। जानकारों का कहना है की विदेशी कंपनियां इस बात पर भी विचार कर रही हैं कि किसी भारतीय एयरलाइंस के साथ साझेदारी करके जेट एयरवेज के अधिग्रहण की दावेदारी पेश की जाए। फिलहाल अभी सबको इंतजार है कि इस कंपनी पर छाए संकट के बादल जल्द से जल्द छंटे।

Previous articleसच, साहस और सरोकार की त्रिवेणी
Next articleहमारी आधी सीटें कहां हैं?
रांची विश्वविद्यालय से स्नातक। वर्ष 1988 में रांची में ही फील्ड रिपोर्टर के रूप में रांची एक्सप्रेस से जुड़े। उसके बाद साप्ताहिक रविवार, प्रभात खबर, सेंटिनल, पांचजन्य, राजस्थान पत्रिका, टेलीग्राफ, इकोनॉमिक्स टाइम्स, अमर उजाला, बीएजी फिल्म्स, न्यूज 24, इंडिया टीवी, जी न्यूज जैसी संस्थाओं के लिए उप संपादक से लेकर विशेष संवाददाता, सहायक फीचर एडिटर, समन्वय संपादक, एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। टीवी की दुनिया में ‘पोलखोल’ और ‘सनसनी’ जैसे कार्यक्रमों का भी प्रोडक्शन किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here